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संज्ञा और सर्वनाम — lesson overview

संज्ञा: नाम का बोध

किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव या गुण के नाम का बोध कराने वाले शब्द को संज्ञा कहते हैं। उदाहरण: शिक्षक, पुस्तक, दिल्ली और ईमानदारी।

व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति या स्थान आदि का नाम बताती है, जैसे सीता और पटना। जातिवाचक संज्ञा एक वर्ग का सामान्य नाम बताती है, जैसे लड़की और नगर।

भाववाचक संज्ञा गुण, अवस्था या भाव का बोध कराती है, जैसे मिठास, बचपन और प्रसन्नता। उदाहरण का वर्गीकरण उसके वाक्यगत प्रयोग को देखकर करें।

सर्वनाम: संज्ञा के स्थान पर

संज्ञा की पुनरावृत्ति से बचने या उसके स्थान पर प्रयोग होने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं। उदाहरण: वह, यह, मैं, तुम, कोई और कौन।

“रीना पढ़ रही है। वह परीक्षा की तैयारी कर रही है।” दूसरे वाक्य में “वह” का सम्बन्ध रीना से है।

“यह मेरी पुस्तक है” और “यह पुस्तक मेरी है” में “यह” का कार्य एक जैसा मान लेना ठीक नहीं। दूसरे वाक्य में वह संज्ञा “पुस्तक” का संकेत कर रहा है; व्याकरणिक भूमिका पूरे वाक्य से पहचानें।

वाक्य में पहचान

पहले यह समझें कि शब्द किसका नाम बता रहा है या किसके स्थान पर आया है। केवल शब्द-सूची याद करने से संदर्भगत प्रश्न हल नहीं होते।

“कौन आया?” में कौन प्रश्नवाचक सर्वनाम है। “कोई आया है” में कोई अनिश्चित व्यक्ति का बोध कराता है।

भाषा के नियमों को अपने बनाए सही वाक्यों से जाँचें। लिंग, वचन और कारक के अनुसार अन्य शब्दों का रूप भी प्रभावित हो सकता है।

संज्ञा का भेद अर्थ और संदर्भ से पहचानें

संज्ञा किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, समूह, पदार्थ या भाव का बोध कराती है। भेद पहचानते समय केवल शब्द का रूप न देखें; वाक्य में उसका आशय देखें। ‘गंगा’ किसी विशेष नदी का नाम है, इसलिए व्यक्तिवाचक है; ‘नदी’ उसी प्रकार की अनेक वस्तुओं का सामान्य बोध कराती है, इसलिए जातिवाचक है। ‘मिठास’ किसी वस्तु का नाम नहीं, उसके गुण का भाव है, इसलिए भाववाचक है।

द्रव्यवाचक और समूहवाचक वर्गीकरण में प्रयुक्त पुस्तक की पद्धति समझें। ‘सोना’ पदार्थ का बोध करा सकता है, जबकि ‘सेना’ समूह का बोध कराती है। अलग-अलग व्याकरण पुस्तकों में मुख्य भेदों और उपभेदों की व्यवस्था कुछ भिन्न मिल सकती है; परीक्षा में निर्धारित पाठ्यपुस्तक की पद्धति अपनाएँ। परिभाषा समझे बिना किसी एक सूची को हर प्रश्न पर लागू करना उचित नहीं है।

संदर्भ शब्द का वर्ग बदल सकता है। ‘सुंदर’ सामान्यतः विशेषण है, लेकिन ‘सुंदरता’ गुण का नाम बनकर भाववाचक संज्ञा है। भाववाचक संज्ञा बनाते समय केवल एक प्रत्यय सब शब्दों पर नहीं लगता: ‘मीठा–मिठास’, ‘बच्चा–बचपन’ और ‘मित्र–मित्रता’ अलग रचनाएँ हैं। अभ्यास में मूल शब्द, नया रूप और दोनों के अर्थ का संबंध साथ लिखें।

सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण में अंतर

सर्वनाम संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होता है या संदर्भ से किसी व्यक्ति अथवा वस्तु की ओर संकेत करता है। ‘वह आया’ में ‘वह’ स्वतंत्र रूप से व्यक्ति का बोध कराता है। ‘वह लड़का आया’ में ‘वह’ संज्ञा ‘लड़का’ का संकेतात्मक निर्धारण करता है; विद्यालयी व्याकरण में इसे सार्वनामिक विशेषण के रूप में समझा जाता है। एक ही शब्द को हर वाक्य में बिना संदर्भ देखे एक ही पद मानना गलती है।

‘मैं, हम, तुम, आप, वह’ पुरुषवाचक प्रयोग दिखाते हैं; ‘कौन’ प्रश्नवाचक, ‘कोई’ अनिश्चयवाचक और ‘जो–वह’ संबंधसूचक संरचना दिखा सकते हैं। ‘मैं अपना काम करूँगा’ में ‘अपना’ कर्ता से संबंध बताता है। ‘सीता अपनी पुस्तक लाई’ और ‘मोहन अपनी पुस्तक लाया’ में ‘अपनी’ पुस्तक के स्त्रीलिंग रूप से जुड़ता है; स्वामी का लिंग देखकर रूप तय नहीं किया जाता।

सर्वनाम का संकेत स्पष्ट रहना चाहिए। ‘रीना ने सीमा से कहा कि वह देर से आएगी’ में ‘वह’ किसके लिए है, संदर्भ के बिना अस्पष्ट हो सकता है। अच्छे वाक्य में संज्ञा दोहराना कभी-कभी अस्पष्ट सर्वनाम से बेहतर है। परीक्षा में पद-परिचय करते समय उसका प्रकार, पुरुष, वचन, कारक-संबंध और संदर्भित संज्ञा देखें; केवल याद किया हुआ उदाहरण न दोहराएँ।